St. Vincent's School
हे हमारे पिता,
तू जो स्वर्ग में है;
तेरा नाम पवित्र माना जावे,
तेरा राज्य आवे,
तेरी इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी होवे।
हमारा प्रतिदिन का आहार आज हमें दे,
और हमारे अपराध हमें क्षमा कर,
जैसे हम भी अपने अपराधियों को क्षमा करते हैं,
और हमें परीक्षा में न डाल,
परन्तु बुराई से बचा।
हे प्रभु! मुझे अपनी शांति का संवाहक बना! जहाँ घृणा हो, वहाँ मैं प्रेम बाँटूँ; जहाँ उपकार की भावना हो, वहाँ मैं क्षमा करूँ; जहाँ मतभेद हो, वहाँ एकता बनाऊँ; जहाँ शंका हो, वहाँ श्रद्धा जगाऊँ; जहाँ निराशा हो, वहाँ आशा का संचार करूँ; जहाँ अंधकार हो, वहाँ प्रकाश फैलाऊँ और जहाँ दुःख हो, वहाँ आनन्द भर दूँ!
हे दिव्य गुरु! मुझ पर ऐसी कृपा कर कि मैं सांत्वना पाने की अपेक्षा दूसरों को सांत्वना देने का प्रयत्न करूँ; मुझे कोई समझे, इसकी अपेक्षा मैं दूसरों को समझूँ; कोई मुझसे प्रेम करे, इसकी अपेक्षा मैं दूसरों से निष्काम प्रेम करूँ!
क्योंकि देने में ही प्राप्ति निहित है, क्षमा करने से ही क्षमा मिलती है, और स्व-त्याग (मरण) में ही हम अनन्त जीवन को प्राप्त करते हैं।